कोरबा।जिले में साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की कोल माइंस में लगातार हो रहे घटनाओं और सुरक्षा को मिल रही चुनौती को दूर करने के लिए सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स आगामी दिनों में खुद काम करेगी। कोल माइंस में वह अपने हिसाब से अपराध नियंत्रण करेगी और रिपोर्ट लॉन्च करने के साथ अगली कार्रवाई भी करेगी। खबर है कि 6 महीने में पूर्व जिले के अंतर्गत आने वाले चार एरिया में इस योजना का क्रियान्वयन किया जाएगा। वर्तमान स्थिति में कुछ माइंस में सुरक्षा की जिम्मेदारी सीआईएसएफ के कंधे पर हैं और कुछ में त्रिपुरा राइफल्स को जिम्मेदारी दी गई है। कोल इंडिया ने अपनी लाभकारी कंपनी एसईसीएल क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर हर महीने करोड़ों रुपए खर्च करना तय किया है। इन सबके बावजूद बीते वर्षों में ऐसे अनुभव सामने आए हैं कि संगठित आपराधिक गिरोह डीजल कोयला से लेकर स्क्रैप की चोरी करता रहा है। इस दौरान हस्तक्षेप करने पर मौके पर तैनात सुरक्षा कर्मियों की जान पर संकट आए। देरी से होने वाली पुलिस कार्रवाई ने भी सवाल खड़े किए हैं और कोल फील्ड्स प्रबंधन को दूसरे उपाय अपनाने के लिए मजबूर किया है।
जानकारी के अनुसार इन सभी चीजों को सामने रखते हुए अब सुनिश्चित किया जा रहा है कि छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में संचालित साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड की खदानों में सीआईएसएफ सुरक्षा से लेकर सभी कार्रवाई खुद करेंगी। अधिकतम 6 महीने में इसके लिए जरूरी सेटअप तैयार कर लिया जाएगा और इसका संचालन भी शुरू कर दिया जाएगा। सूत्रों ने बताया कि व्यवस्था के अंतर्गत पुख्ता प्रबंधन के तहत दिन और नाइट पेट्रोलिंग करते हुए सीआईएसएफ अपराधिक तत्वों की न केवल निगरानी करेगी बल्कि धर पकड़ के साथ अगली कार्यवाई भी करेगी। यही नहीं आरोपियों को सही जगह भेजने के लिए उसकी अपनी व्यवस्था होगी। यह सब किए जाने से कई प्रकार की धारणाएं दूर होगी और कंपनी को लगातार होने वाले नुकसान से मुक्त किया जा सकेगा।
सूत्रों ने बताया कि कुसमुंडा और अन्य स्थान पर सुरक्षा का दारोमदार बीते वर्षों में त्रिपुरा राइफल्स को दिया गया है। उसके जवानों ने अपनी उपस्थिति से संबंधित क्षेत्रों में संगठित अपराध की रोकथाम करने से लेकर ऐसे कार्यों में संलिप्त तत्वों को सबक सिखाया है। इसके बावजूद समय-समय पर इन क्षेत्रों में होने वाली घटनाएं प्रबंधन और जांच एजेंसियों के लिए पहेली बनी हुई है कि आखिर सख्ती के बावजूद ऐसी घटनाएं कैसे हो सकती है। कारण चाहे जो हो, खदानों में सुरक्षा से लेकर दूसरी जिम्मेदारियों को सुनिश्चित करने के साथ ही त्रिपुरा राईफल्स को कोरबा जिले से वापस कर दिया जाएगा।




