पुलिस अधीक्षक यशपाल सिंह ने बताया कि डीआरजी, सीएएफ और स्थानीय पुलिस की टीम ने संयुक्त रूप से ऑपरेशन चलाया था। साथ ही बस्तर के कांकेर जिले से भी बैकअप टीम तैनात की गई थी। घेराबंदी के दौरान संदिग्ध गतिविधियां नजर आने पर नक्सली भाग निकले, हालांकि जवानों ने उनका पीछा किया लेकिन वे जंगल की आड़ में बच गए। सर्चिंग के दौरान सुरक्षा बलों को नक्सली ठिकाने से एक इंसास राइफल, 15 जिंदा कारतूस और अन्य सामग्री बरामद हुई। यह राइफल वर्ष 2010 में कांकेर जिले के दुर्गुकोंदल क्षेत्र से लूटी गई थी, जिसे महिला नक्सली हिड़मे के पास रखा गया था। पुलिस के अनुसार मौके पर एसीएम स्तर के नक्सली मंगेश, उसकी पत्नी हिड़मे और एक अन्य महिला नक्सली राजे की मौजूदगी थी। जवानों ने भागते समय उनकी पहचान कर ली है और उनकी तस्वीरें भी पुलिस के पास मौजूद हैं।
इस कार्रवाई में सबसे अहम एक पत्र बरामद हुआ है, जिसे मंगेश ने अपने शीर्ष नेतृत्व को लिखा था। पत्र में आत्मसमर्पण को लेकर निर्देश मांगे गए हैं, जिससे संगठन के भीतर दबाव और असमंजस की स्थिति के संकेत मिलते हैं।पुलिस का कहना है कि मोहला-मानपुर क्षेत्र में अब केवल कुछ ही सक्रिय नक्सली बचे हैं और लगातार अभियान जारी है। शेष नक्सलियों से आत्मसमर्पण करने की अपील भी की गई है। गौरतलब है कि केंद्र सरकार द्वारा नक्सलवाद के खात्मे के लिए तय समयसीमा करीब आ चुकी है, लेकिन इलाके में अभी भी नक्सली गतिविधियों की मौजूदगी से यह सवाल उठ रहा है कि क्या तय समय में यह क्षेत्र पूरी तरह नक्सल मुक्त हो पाएगा।





