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मुकुल बेनेट की मौत के जिम्मेदार छत्तीसगढ़ डायोसिस के पदाधिकारियों पर परिजनों व समिति ने FIR की मांग किया

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रायपुर। ’रोता बिलखता और न्याय के लिए तड़पते हुआ मेरे पापा मुकुल बेनेट चले गए और कितनों की जान लेंगें डायोसिस के पदाधिकारी ? बेटी ने बिलखते हुए कंधा दिया तो जन समूह भी रो पड़ा दृश्य बेहद मार्मिक था, पिता बेबसी में चला गया उसी बेबसी में जिसकी डोली उठनी थी उसने अर्थी उठाया।
      गौरतलब है कि मुकुल बेनेट सालेम इंग्लिश स्कूल में 1982 से कर्मचारी थे, स्कूल की अव्यवस्था व अपने अधिकार के लिए आवाज उठाते थे, अपनी सेलरी व पीएफ के पैसों की मांग करते रहे जिससे छुब्ध होकर स्कूल की प्रभारी प्राचार्य रुपिका लॉरेंस एवं मैनेजर नितिन लॉरेंस ने झूठा आरोप लगाते हुए अत्यधिक प्रताड़ित किया और सितंबर 2023 को नौकरी से निलंबित कर दिया, कभी कोई जांच नही की गईं ना ही चार्जशीट दिया गया। साथ ही जून 2024 को उनकी पत्नी श्रीमती डी.पी.बेनेट को भी द्वेषपूर्वक झूठे आरोप लगाकर निलंबित कर दिया गया जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत ही दयनीय हो गयी, लगातार अपने न्याय के लिए संघर्ष करते रहे, प्रमुख प्रबंधकों से बार-बार गुहार लगाते रहे परन्तु प्रबंधको ने उनके गुहार की तरफ ध्यान भी नहीं दिया और जानबूझकर उनको बार-बार प्रताड़ित करते रहे एवं दुत्कारते रहे, जब भी अपने नौकरी में बहाल करने का निवेदन करने डायोसिस व स्कूल जाते तो उनको गाली देकर बेइज्जत करके निकाल दिया जाता था। नौकरी से बिना कारण निकाले जाने से पैसों की कमी के कारण युवा बेटी का विवाह भी नही हो रहा था।

इसी बीच बदले की भावना से पूरे समाज से बेनेट परिवार व अन्य 42 लोगो को छत्तीसगढ़ डायोसिस द्वारा अवैधानिक तरीके से बहिष्कृत कर दिया गया। इस निर्मम आदेश से मुकुल बेनेट का परिवार बहुत टूट गया, लगातार अपमान और तिरस्कार से समाजिक मृत्यु के साथ ही हिर्दय घात से मृत्यु हो गयी। यह उनकी सामान्य मृत्यु नही सोची समझी साजिश है, यह आरोप परिजनों एवं छत्तीसगढ़ डायोसिस बचाओ संघर्ष समिति के सदस्यों ने किया है। अपने शिकायत में कलेक्टर रायपुर, पुलिस अधीक्षक व थाना प्रभारी को निवेदन किया है कि मुकुल बेनेट की मौत के लिए सालेम स्कूल की प्रभारी प्राचार्य रुपिका लॉरेंस, मैनेजर नितिन लॉरेंस, चेयरमैन सुषमा कुमार, सचिव जयदीप रॉबिन्सन व सीएनआई के मॉडरेटर बी.के.नायक के विरुद्ध तत्काल कड़ी कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज किया जाए।
नितिन लॉरेंस ने अपने को बचाने का असफल प्रयास किया है
मुकुल बेनेट की मौत की शिकायत के बाद घबराकर नितिन लॉरेंस ने पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखा है कि उनपर आरोप गलत है, जबकि परिजनों ने बताया कि मुकुल बेनेट के मौत का मुख्य कारण निलंबन की अवधि में लोक सेवा अधिनियम के अंतर्गत कर्मचारी को परिवार निर्वाहन भत्ता के रूप में आधी तनख्वाह दिया जाना अनिवार्य होता है, जबकि नही देना कानूनी अपराध। जबकि मुकुल बेनेट व उनकी पत्नी दोनों के निलंबन अबधि में न तो निर्वाहन भत्ता दिया गया ना ही पीएफ की राशि जमा की गई, जिसकी शिकायत भी पीएफ ऑफिस व सिविल लाइंस थाने में अन्य शिक्षकों द्वारा भी किया गया है। आर्थिक समस्या का बोझ मुकुल सह नही पाया और मानसिक प्रताड़ना ही मौत का कारण बना। अतः इस मौत की की पूर्ण जिम्मेदारी सालेम स्कूल के प्रबंधन व छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ एजुकेशन के पदाधिकारियों की ही है।
छत्तीसगढ़ के मसीह समाज के लोगो ने घटना की घोर भर्त्सना की है
अध्यक्ष अजय जॉन व प्रमुख सदस्य यशराज सिंह व अन्य ने कहा कि मुकुल बेनेट के जाने की त्रासदी हर किसी को गहरा घांव दे गया, डायोसिस की गुंडागर्दी तानाशाही, निजी स्वार्थ और हट ने एक परिवार को उजाड़ दिया, पत्नी को विधवा और बच्चों को अनाथ कर दिया। पति और पत्नी दोनों को बिना किसी चार्ज के नौकरी से निकाल दिया कोई जांच आज तक नहीं की गई। इस पूरे घटना की मसीही परिवार घोर भर्तस्ना किया है और प्रकरण के जांच की मांग की है।
डायोसिस के अन्य स्कूलों और पेण्ड्रा में भी इसी मनमाने तरीके से प्रभारी प्राचार्य को असंवैधानिक तरीके से हटा दिया है, वह भी प्राचार्य की अनुपस्थिति में कक्ष का ताला तोड़कर नया प्राचार्य बनाया गया है, वह भी सरकारी अनुदान प्राप्त शाला में, प्रश्न यह है ऐसी भी क्या जल्दी थी प्राचार्य को हटाने की ? प्राचार्य को अवकाश से वापस तो आने देते 2 दिन बाद तो वापस आ ही रही थी प्राचार्या। इस तरह से नियम के विपरीत की गई कार्यवाही से महिला प्राचार्य सकते में मानसिक रूप से दबाव में है अगर कोई अप्रिय घटना होती है तो इसकी सम्पूर्ण जवाबदारी छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ एजुकेशन के पदाधिकारियों की होगी, क्योकि बोर्ड के नीतिगत कार्यो में स्थगन आदेश है परन्तु बोर्ड के अधिकारी खुद गम्भीर अपराध पर जमानत में है और अपने को कानून से भी बड़ा समझते है।

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Author: Samarthy News

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