वांगचुक ने अपने संदेश में लिखा कि यह लोकतंत्र की जीत है, जो जनता की आवाज से निकली है। उन्होंने छात्र संगठन सीजेपी, देश की युवा पीढ़ी और उन नागरिकों को बधाई दी, जिन्होंने बिना भय के अपनी बात रखी और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को मजबूती से उठाया।
नीट-यूजी परीक्षा विवाद के दौरान सोनम वांगचुक छात्रों के समर्थन में खुलकर सामने आए थे। उन्होंने जंतर-मंतर पर शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही की मांग को लेकर 20 दिनों तक अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की। अनशन के दौरान तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिसके बाद इस आंदोलन ने राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक ध्यान आकर्षित किया।
वांगचुक के अस्पताल में भर्ती होने के बाद आंदोलन को नया बल मिला। इसके बाद सीजेपी प्रमुख अभिजीत दिपके भी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए, जिससे छात्रों के आंदोलन और शिक्षा सुधार की मांग को और गति मिली।
इधर, इस्तीफा देने के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने भी सोशल मीडिया पर अपना त्यागपत्र साझा किया। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि पिछले चार दशकों से उनका जीवन छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि मजबूत, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही राष्ट्र निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण आधारशिला है




