सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, उन्हें वोट देने की अनुमति देने का सवाल ही क्या है? अगर हम इसकी अनुमति देते हैं, तो फिर हमें उन लोगों के मतदान के अधिकार छीनने होंगे जो इसमें शामिल हैं। कोर्ट ने ध्यान दिया कि मतदाता सूची में अपना नाम शामिल न किए जाने को चुनौती देते हुए अपीलीय न्यायाधिकरणों के समक्ष अब तक 34 लाख से अधिक अपीलें दायर की जा चुकी हैं।
एसआईआर को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बंदोपाध्याय ने कहा कि बंगाल की जनता न्यायालय की ओर देखती है, 34 लाख लोग वास्तविक मतदाता हैं, जो अपने मताधिकार का प्रयोग चाहते हैं। इस पर न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि जिनकी अपीलें 9 अप्रैल तक स्वीकार की गई हैं, उन्हें मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा। हालांकि, अदालत ने कहा कि वह उन लोगों को मतदान की अनुमति नहीं दे सकती जिनके मामले लंबित हैं।
बार एंड बेंच के मुताबिक, सुनवाई के बीच राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने मालदा जिले में 1 अप्रैल को न्यायिक अधिकारियों के घेराव के मामले में अपनी स्थिति रिपोर्ट पेश की। सीजेआई ने कहा एजेंसी से आरोपियों की राजनीतिक पृष्ठभूमि के बारे में जानकारी देने को कहा है। बता दें कि मतदाता सूचियों की समीक्षा में शामिल 3 महिला न्यायाधीशों सहित 7 न्यायिक अधिकारियों को 1 अप्रैल को मालदा में आक्रोशित मतदाताओं द्वारा घंटों बंधक बनाया गया था।




