सूरजपुर। छत्तीसगढ़ में पारित धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026 के विरोध में मसीही समाज ने सूरजपुर में व्यापक विरोध प्रदर्शन किया। ईसाई आदिवासी महासभा और संयुक्त मसीही सेवा समिति सूरजपुर के नेतृत्व में हजारों लोगों ने रैली निकालकर राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा।
प्रदर्शनकारियों ने अपने ज्ञापन में कहा कि फरवरी-मार्च 2026 के विधानसभा सत्र में पारित यह विधेयक संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। उनका आरोप है कि यह कानून नागरिकों को धर्म मानने, उसका पालन करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता पर रोक लगाता है।
मसीही समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि भारतीय संविधान की प्रस्तावना में विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता का स्पष्ट उल्लेख है। साथ ही भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25 प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म को मानने, आचरण करने और प्रचार करने का मौलिक अधिकार प्रदान करता है। ऐसे में यह विधेयक इन अधिकारों का उल्लंघन करता है।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि विधेयक में धार्मिक आचरण और प्रचार को भी धर्मांतरण की श्रेणी में रखते हुए प्रतिबंधित करने का प्रयास किया गया है, जो असंवैधानिक है। उन्होंने राज्यपाल से हस्तक्षेप कर इस विधेयक पर पुनर्विचार करने की मांग की।
ज्ञापन सौंपने वालों में समिति के अध्यक्ष अजय लाल, जेम्स कुजूर, सचिव प्रदीप केरकेट्टा, सुमन टोप्पो, नरेश तिर्की, नोहर तिर्की सहित बड़ी संख्या में महिला-पुरुष शामिल रहे।





