कौन खत्म कर रहा है चिरमिरी की पहचान
विजय लाल
चिरमिरी। जिस विद्यालय में पढ़कर चीफ जस्टिस बने आज वहीं विद्यालय अपने ही दूर्दशा पर आंसू बहा रहा है। एक समय था कि चिरमिरी के इस विद्यालय में विद्यार्थी पढ़ने का तो अलग इच्छुक रखते थे, वहीं दुसरी तरफ देखने के लिए लोग इसलिए आते थे कि 77 वर्ष पूर्व इस विद्यालय को दो मंजील में निर्माण कराया गया था। अगर चिरमिरी के विकास व शिक्षा की बात की जाएं तो चिरमिरी को बसाने में दादु स्व. विभुति भूषण लाहिड़ी ने अपनी अलग पहचान बनाई, जो चिरमिरी के इतिहास के पन्नों में अंकित है। स्व. विभुति भुषण लाहिड़ी ने ही चिरमिरी में कोयला उत्खन्न का कार्य किया। जिससें कि लोगो को एक रोजगार मिल सकें। इसके आलावा कोयला कर्मियों के बच्चों को शिक्षा मुहैया कराने के लिए चिरमिरी छोटा बाजार में सर्वप्रथम बंगला स्कूल की स्थापना कराई, उसके बाद छात्रों के हित व आगे की पढ़ाई जारी रखने के लाहिड़ी बहुउद्देशीय उच्च माध्यमिक विद्यालय की स्थापना चिरमिरी छोटा बाजार में किए, जिससें कि स्थानीय बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल सकें। मगर स्व. श्री दादू लाहिड़ी शिक्षा की अलख जगाने की एक अलग सांेच रखी, उन्होने बच्चों की आगे की पढ़ाई कहा व कैसे करेंगे इस संदर्भ में स्व. दादू लाहिड़ी ने सरगुजा के राजा स्व. रामानुज प्रताप सिंह से मिलकर म0प्र0 के सागर युर्निवसीटी से अनुबंध करा कर चिरमिरी में ही लाहिड़ी काॅलेज की स्थापना कराई।
एक समय था कि सरगुजा अंबिकापुर से भी काॅलेज की पढ़ाई करने छात्र-छात्राएं चिरमिरी कूच किया करते थे। ये वहीं लाहिड़ी स्कूल व काॅलेज है, यही से शिक्षा ग्रहण कर हिमाचल प्रदेश के चीफ जस्टीस व एमपी व एमएलए बने, यहीं नहीं आज भी इतिहास गवाह है कि देश के कई स्थानों में इसी विद्यालय व काॅलेज में अध्ययनरत् छात्र-छात्राएं अच्छे सरकारी विभाग हो या नीजि कंपनी अच्छे पद पर विराजमान होकर इस स्कूल व काॅलेज का नाम रोशन कर रहे है।
सोचनीय पहलू यह है कि आज वहीं छोटा बाजार स्थित लाहिड़ी विद्यालय बेहद जर्जर अवस्था में तब्दील हो चुका है, जबकि चिरमिरी क्षेत्र में नगर निगम व एसईसीएल दोनो का ही हस्तक्षेप है मगर इसके बावजूद भी खंडहरनुमा दूर्दशा में खड़ा है। अगर एसईसीएल व नगर निगम तथा जनप्रतिनिधी थोड़ा भी लाहिड़ी स्कूल की इस दूर्दशा से वाजिब है तो इसकी मरम्मत क्यों नहीं करा पा रहे। इस संदर्भ में लाहिड़ी स्कूल के प्राचार्य व प्रबंध समिति कई बार कलेक्टर व विधायक तथा नगर निगम को जीर्णोद्वार के लिए पत्र लिखे व स्वयं जाकर संबंधित विभाग व जनप्रतिनिधियों से मिले, फिर भी कोई निर्णय सामने नहीं आ रहा है। वर्तमान समय की बात करें तो आज स्थिति इस विद्यालय की ऐसी हो चुकी है कि कभी भी भरभरा कर गिर सकता है। जिससें की आसपास के लोगो की भी जान जोखिम में पड़ सकती है। आखिरकार इन सब की जिम्मदारी कौन उठायेगा ? क्या एसईसीएल, नगर निगम व जनप्रतिनिधि तमाशबीन बैठ दुर्घटना का इंतजार कर रहे है।




