तीन महीने पहले की शिकायत, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई

पीडि़त परिवार का कहना है कि सरकारी जमीन पर कथित अवैध कब्जे और रास्ता बंद होने को लेकर उन्होंने नायब तहसीलदार से शिकायत की थी। शिकायत के करीब तीन महीने बीत जाने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ। परिवार के मुताबिक, इसके बाद मामले की जानकारी कलेक्टर और एसपी को भी दी गई, लेकिन रास्ते की समस्या जस की तस बनी रही। ग्रामीणों का सवाल है कि जब मामले की शिकायत प्रशासन के अधिकारियों तक पहुंच चुकी थी, तो कथित अवैध कब्जे के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई। उनका कहना है कि रास्ता नहीं होने का खामियाजा ग्रामीणों को आपातकालीन परिस्थितियों में भुगतना पड़ रहा है।
5-6 किलोमीटर पहले रुक गई एंबुलेंस
सूरजपुर के सीएमएचओ कपिल देव पैकरा ने बताया कि यह मामला प्रतापपुर क्षेत्र के अन्नपूर्णा सीएचसी के अंतर्गत आने वाले दूरस्थ भेल कच्छ गांव का है। सूचना मिलने पर स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस टीम मौके के लिए रवाना हुई थी, लेकिन सड़क नहीं होने के कारण एंबुलेंस महिला के घर से करीब 5-6 किलोमीटर पहले ही रुक गई।
सीएमएचओ के अनुसार, एंबुलेंस आगे नहीं जा सकी और इसी दौरान रास्ते में ही गर्भवती महिला का प्रसव हो गया। घटना ने दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से गांव तक पहुंचने के लिए स्थायी रास्ता उपलब्ध कराने और कथित अवैध कब्जे की जांच कर कार्रवाई की मांग की है। वहीं, लगातार शिकायतों के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।