नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन का कार्यकाल एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (एसीसी) ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) द्वारा जारी आदेश के अनुसार गोविंद मोहन 22 अगस्त 2026 के बाद भी 22 अगस्त 2027 तक केंद्रीय गृह सचिव के पद पर बने रहेंगे। सरकार ने यह विस्तार मूलभूत सेवा नियम (एफआर) 56 (डी) तथा अखिल भारतीय सेवा (मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति लाभ) नियम, 1958 के नियम 16(1ए) के प्रावधानों में शिथिलता प्रदान करते हुए दिया है। इसी के साथ मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने कैबिनेट सचिव डॉ. टी. वी. सोमनाथन के कार्यकाल में भी एक वर्ष की वृद्धि को मंजूरी दी है, जिससे केंद्र सरकार के शीर्ष प्रशासनिक नेतृत्व में निरंतरता बनी रहेगी। सिक्किम कैडर के वर्ष 1989 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी गोविंद मोहन ने अगस्त 2024 में संस्कृति मंत्रालय के सचिव पद से स्थानांतरित होकर केंद्रीय गृह सचिव का दायित्व संभाला था। पिछले दो वर्षों के दौरान उन्होंने देश की आंतरिक सुरक्षा, सीमा प्रबंधन और आपदा प्रबंधन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए अनेक महत्वपूर्ण पहलों का नेतृत्व किया। गोविंद मोहन ने नक्सलवाद और मादक पदार्थों की तस्करी के विरुद्ध राष्ट्रीय रणनीति तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके कार्यकाल में गृह मंत्रालय ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के आधुनिकीकरण की दिशा में विशेष प्रयास किए। इसके अंतर्गत उन्नत निगरानी प्रणाली, आधुनिक संचार नेटवर्क, अत्याधुनिक हथियार तथा परिवहन सुविधाओं का विस्तार किया गया। सरकार का कहना है कि इन सुधारों से सीमा सुरक्षा, उग्रवाद विरोधी अभियान, नक्सल विरोधी अभियान तथा अन्य आंतरिक सुरक्षा अभियानों की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों में भी गोविंद मोहन की भूमिका अहम रही है। उनके नेतृत्व में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल की टीमों को बाढ़, चक्रवात और भूस्खलन जैसी आपदाओं के समय विभिन्न राज्यों में त्वरित रूप से तैनात किया गया। इसके अलावा राज्यों, सशस्त्र बलों और केंद्रीय एजेंसियों के बीच समन्वय को और मजबूत किया गया, जिससे विशेषकर पूर्वोत्तर तथा अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन और राहत कार्य अधिक प्रभावी बनाए जा सके। केंद्रीय गृह सचिव ने साइबर अपराध, आतंकवाद, संगठित अपराध तथा सीमा पार मादक पदार्थों की तस्करी जैसी उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए भी कई महत्वपूर्ण पहलें कीं। गृह मंत्रालय ने प्रौद्योगिकी आधारित पुलिस व्यवस्था को बढ़ावा दिया, विभिन्न एजेंसियों के बीच खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान को मजबूत किया तथा अपराध की जांच और अनुसंधान में डिजिटल मंचों के उपयोग का विस्तार किया। इसके अतिरिक्त गृह मंत्रालय ने उनके नेतृत्व में कानून-व्यवस्था, आंतरिक सुरक्षा और आपदा प्रबंधन से जुड़े विषयों पर राज्यों के साथ नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित कर समन्वय व्यवस्था को और सुदृढ़ किया।
Author: Samarthy News
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