गूंजती है आज भी फिज़ा में हज़ारों सिसकियांज् क्या था कसूर मेरा, क्या बेटी होना ही कसूर था मेराज् आखिर कब इस समाज की गलियां बेटियों के लिए सुरक्षित होंगी।
लिफ्ट के बहाने वहशत का खेल: क्या थी घटना? विशेष लोक अभियोजक महावीर सिंह किशनावत के अनुसार, घटना 23 अप्रैल 2022 की है:
लिफ्ट का झांसा: जयपुर निवासी महिला अपने पीहर जा रही थी। बस स्टैंड से पैदल जाते समय कार सवार संजू मीणा (23) और कालू मीणा (27) ने उसे लिफ्ट देने के बहाने कार में बैठाया।
वारदात: रास्ते में एक नाबालिग बच्चे को उतारने के बाद आरोपी महिला को सुनसान नदी क्षेत्र में ले गए। वहां उसके साथ दुष्कर्म किया गया, जेवर और नकदी लूट ली गई।
हत्या और साक्ष्य मिटाना: जब महिला ने विरोध किया और परिजनों को बताने की बात कही, तो आरोपियों ने उसकी हत्या कर शव को कुएं में फेंक दिया।
सोशल मीडिया और नाबालिग की गवाही ने दिलाया न्याय
इस अंधे कत्ल का राज एक सोशल मीडिया पोस्ट से खुला। जब परिजनों ने गुमशुदगी की फोटो पोस्ट की, तो कार में लिफ्ट लेने वाले उसी 14 वर्षीय नाबालिग ने फोटो पहचान ली और अपने पिता को बताया कि यह वही महिला थी जो आरोपियों के साथ कार में गई थी। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए 24 अप्रैल को ही दोनों को गिरफ्तार कर लिया।
कानूनी प्रक्रिया और फैसला
गवाह: मामले में कुल 45 गवाहों के बयान दर्ज किए गए
सजा: पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने इसे दुर्लभ से दुर्लभतम श्रेणी का मामला माना और दोनों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई।
एक्सपर्ट कमेंट: समाज को कड़ा संदेश
प्रख्यात कानूनविद एडवोकेट श्याम सुंदर मिश्रा ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा, यह फैसला न केवल पीडि़त परिवार के लिए न्याय का प्रतीक है, बल्कि उन दरिंदों के लिए चेतावनी भी है जो बेटियों की सुरक्षा से खिलवाड़ करते हैं। कानून का यह कड़ा रुख समाज में विश्वास पैदा करेगा।